कल 8 दिसंबर बृहस्पतिवार को नंदा नवमी पर्व है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तथा शुक्ल पक्ष की नवमी को नंदा के नाम से संबोधित किया जाता है। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महानंदानवमी के रुप में जाना जाता है। अष्टमी के दिन व्रत किया जाता है तथा नवमी को भगवान शिव और देवी नंदा के पूजन का विधान है। माना जाता है की नन्दा देवी मां पार्वती का रूप हैं। रात को जागरण करके देवी को भोग लगाया जाता है, फिर नवमी के रोज चण्डिका पूजन से नंदानवमी व्रत का विश्राम होता है। नंदानवमी पर देवी का पूजन और स्त्रोत पाठ करने का विधान है। ये समय दुर्गा पूजा का होता है। इसके अतिरिक्त राशि के अनुसार करें ये उपाय


मेष : शिवलिंग का दही से अभिषेक करें और लाल गुलाल से पूजन करें। जल्द लाभ प्राप्त होगा।  

 
वृषभ : आपको कच्चे दूध से शिव का अभिषेक और जल से स्नान कराना चाहिए। शिव के वाहन नंदी अर्थात बैल को चारा एवं रोटी खिलाने से लाभ होता है।

 
मिथुन : आपको शिव-पार्वती को लाल कनेर के पुष्प, शहद एवं पिस्ता से भोग लगाना चाहिए। बिल्व-पत्र के छह पत्ते चढ़ाने से लाभ होगा।

 
कर्क : आपको कच्चे दूध, सफेद आकड़े एवं दही से पूजन करना चाहिए। मावे से बने मिष्ठान का भोग लगाने से शिव-पार्वती जल्द प्रसन्न होते हैं।

 
सिंह : आपको शीतल जल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए तथा शिव मानस पूजा का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए। विशेष कामनाएं पूर्ण होती हैं।

 
कन्या : आपको शिव-पार्वती पर मूंग की दाल से बनी मिठाई अर्पण करनी चाहिए। बिल्वपत्र, एक फल तथा शिव महिमा का पाठ करना श्रेष्ठ रहता है।

 
तुला : आपको शिव-पार्वती पर सफेद वस्त्र अर्पण करना चाहिए। जीवन साथी के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

 
वृश्चिक : आप गरीबों की सेवा करेंगे तो बुरे प्रभाव दूर हो जाएंगे। 

 
धनु : बेसन से बनी मिठाई शिव जी को अर्पित करते हैं तो लाभ प्राप्त होगा। पीले रंग के वस्त्र माता पार्वती को अर्पण करें तो अत्यधिक फायदा मिलेगा। 

 
मकर : नीले पुष्पों से शिव-पार्वती का पूजन करें। इसके साथ ही धतूरे एवं धतूरे के पुष्पों से पूजन करेंगे तो खास लाभ होगा। 

 
कुंभ : शिव-पार्वती की प्रसन्नता के लिए किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की मदद करनी चाहिए। यह विशेष लाभकारी रहेगा। इससे शिव-पार्वती की प्रसन्नता प्राप्त होगी और अचल सम्पत्ति प्राप्त होने के योग बनेंगे।

 
मीन : शिव-पार्वती की प्रसन्नता के लिए किसी भी एक ज्योर्तिलिंग का दर्शन करना चाहिए। यह संभव न हो तो मन से कल्पना करके ही भगवान के दर्शन करें या द्वादश ज्योर्तिलिंग का पाठ करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है।