आज 3 दिसंबर शनिवार को मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाला श्री सिद्धिविनायक चतुर्थी व्रत है। समस्त देवताओं में प्रथम पूजनीय श्री गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि, सुख एवं सौभाग्य प्रदान करने वाले देवता की संज्ञा दी गई है। किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है।


कहते हैं कि महादेव पुत्र श्री गणेश के नाम का शुद्ध चित्त भाव से चिंतन करने तथा उनकी श्रद्धा भाव से आराधना करते रहने से जीवन के कष्ट और दुर्भाग्य दूर होते हैं। श्री गणेश का मंत्र जप करने से मन में अच्छे विचार और सकारात्मक भाव आने लगते हैं। जिन मनुष्यों का आत्मविश्वास कमजोर होता है उनमें भी श्री गणेश जी की आराधना से विश्वास की भावना मजबूत होने लगती है।


भगवान् श्री गणेश मंत्र बहुत मंगलकारी है जिसका प्रत्येक बुधवार के साथ-साथ चतुर्थी तिथि को मनोयोग से जप करने से जीवन में शुभता आती है। श्री गणेश मंत्र जप हेतु श्री गणेश जी की प्रतिमा को पीत वस्त्र से ढकी चौकी पर स्थापित करके सिंदूर, अक्षत, दूर्वा, लाल मौली, सुपारी, फल जनेऊ, बूंदी अथवा बेसन का लड्डू, मिठाई आदि समर्पित करते हुए पूर्ण श्रद्धा भाव से श्री गणेश का पूजन करना चाहिए। 


अंत में श्री गणेश जी की आरती करते हुए ॐ श्री गणेशाय नम: और ॐ नमो शिवाय का उच्चारण करना चाहिए। श्री गणेश जी से अपने द्वारा किए हुए गलत कार्यों को क्षमा करने की प्रार्थना करते हुए सुख, समृद्धि, सौभाग्य एवं शांति की कामना करनी चाहिए। शीघ्र फल प्राप्ति हेतु प्रत्येक बुधवार अथवा माह की चतुर्थी तिथि को उपवास रखते हुए पूर्ण विश्वास और शुद्ध आचरण के साथ श्री गणेश का पूजन, श्री गणेश मंत्र जप और श्री गणेश उपासना करनी चाहिए।