पटना। लोक आस्था का महापर्व छठ सोमवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। इसके पहले रविवार की शाम अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को छठ महापर्व का पहला अर्घ्य दिया गया। सोमवार को पटना समेत पूरे बिहार में गंगा और अन्य पवित्र नदियों और पोखरों में व्रतियों तथा श्रद्धालुओं ने सूप में फल, फूल, ठेकुआ, दीप आदि रखकर अर्घ्य अर्पित किया। छठी माई नैहर से विदा हुईं। अगले वर्ष फिर आएंगी।

सोमवार सुबह तीन बजे से छठव्रतियों का गंगा के घाट पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पांच बजते-बजते नदी का तट व्रतियों एवं उनके परिजनों से पट चुका था। जैसे ही पूर्व दिशा से सूर्य की लालिमा दिखाई दी, गंगा तटों पर अर्घ्य देने का सिलसिला शुरू हो गया।

व्रतियों एवं परिजनों ने गाय के दूध एवं गंगा जल से अर्घ्य दिया। घाट पर हवन भी किया गया। व्रतियों ने गंगा तट पर स्थित मंदिरों में पूजा भी की। घाटों पर लाखों व्रतियों ने नदी के जल में स्नान कर भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। घाट छठी माई के गीतों से गूंजते रहे। कई लोगों ने रविवार शाम को अर्घ्य देने के बाद घाट पर ही सोमवार सुबह तक डेरा जमाए रखा।