कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा करने का विशेष विधान है, खास तौर पर पड़ने वाली शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि पर, इस समय सूर्य नीच राशि में होता है। स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं न हों इसलिए सूर्य देव की विशिष्ट अराधना करने का विधान है। विज्ञान की मानें तो कार्तिक मास में ऊर्जा और स्वास्थ्य को उच्च रखने के लिए सूर्य पूजन अवश्य करना चाहिए। वैसे तो प्रतिदिन दिन का आरंभ सूर्य उपासना से करना चाहिए, संभव न हो तो उनके प्रिय दिन रविवार को अवश्य ये काम करना चाहिए। कल 6 नवंबर रविवार को सूर्य षष्ठी पर्व है। जो उनको समर्पित दिन की महत्वता तो बढ़ा रहा है। ज्योत‌िषशास्‍त्र के अनुसार नाम, राज्य और यश के चाहवान व्यक्ति को इस तरह का भोजन खाने और खिलाने से होते हैं बड़े फायदे।


* रव‌िवार को गुड और गेहूं से बना रोट भगवान विष्णु पर चढ़ाकर ब्राह्मणों को दान करने और खुद प्रसाद रूप में खाने से सौभाग्य प्राप्त होता है।

 

* रविवार को बेसन से बने लड्डू अथवा बर्फी लाकर सूर्य देव को भोग लगाकर सभी पारिवारिक सदस्य मिल-बांट कर खाएं।

 

* रविवार को गुड़ की खीर बनाकर स्वयं भी खाएं और दूसरों को भी खिलाएं। संभव न हो तो गुड़ ही खाएं और खिलाएं।

 

* चीनी अथवा गुड़ की रोटी बनाकर खाएं और कुत्तों को भी ख‌िलाएं।

 

* बैल अथवा सांड को गुड़ और गेहूं खिलाएं।

 

* रविवार को राजमा के सेवन से रक्त संचार बेहतर होता है।

 

* रविवार को चुकंदर के सेवन से शरीर में जीवनप्रद ऊर्जा का संचार होता है।

 

* शन‌िवार की रात को सोने से पहले तांबे के बर्तन में पानी भरकर रख दें। रविवार को सुबह उठते ही इस पानी को पीएं। इससे आपके तन-मन पर सूर्य का प्रभाव बढ़ेगा और बहुत से रोगों से निजात मिलेगा।

 

* रव‌िवार को नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। संभव न हो तो सूर्यास्त से पहले नमक का सेवन न करें।