रियो डी जनीरो

2004 के बाद से कनाडा के खिलाफ अपने सारे मैच जीतने वाली भारतीय टीम अपनी जीत के क्रम को बरकरार रखने के लिए मैदान पर उतरी लेकिन वह इस क्रम को बरकरार नहीं पाई और मैच को ड्रॉ पर ही रोकना पड़ा। पूल बी में भारत और कनाडा का यह मैच 2-2 के स्कोर पर ड्रॉ हो गया।

मैच के पहले क्वॉर्टर में कोई टीम गोल नहीं कर सकी। कनाडा के डिफेंस ने काफी अच्छा खेल दिखाते हुए भारत को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। हालांकि खेल के 14वें मिनट में भारत को एक पेनल्टी कॉर्नर मिला और लेकिन कनाडा के गोलकीपर ने शानदार तरीके बचाव किया। इसके तुरंत बाद कनाडा ने जवाबी हमला किया लेकिन भारतीय रक्षात्मक पंक्ति के बेहतरीन बचाव के चलते वह गोल नहीं कर सकी। और इस तरह पहला क्वॉर्टर बिना किसी गोल के समाप्त हो गया।

दूसरा क्वॉर्टर शुरु होने के बाद खेल के 18वें मिनट में भारत ने हमलावर रुख अपनाते हुए गोल करने की कोशिश की लेकिन कनाडा के गोलकीपर ने दो शानदार बचाव किये और भारतीय टीम को बढ़त नहीं लेने दी। हालांकि 27वें मिनट में भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन भारतीय टीम इस मौके का फायदा नहीं उठा सकी और गोल करने में असफल रही। हाफ टाइम तक भी कोई टीम गोल नहीं कर पाई और दोनों टीमें 0-0 से बराबरी पर बनी रहीं। आखिरकार तीसरे क्वॉर्टर के तीसरे मिनट में भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला और आकाशदीप ने इस मौके को गोल में बदलने में कोई गलती न करते हुए भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके तुरंत बाद कनाडा ने भी जवाबी हमला शुरू किया और स्कॉट टपर ने मुकाबले को 1-1 की बराबरी पर ला दिया। 36वें मिनट में कनाडा ने एक और गोल किया लेकिन रेफरी ने इसे नकार दिया। विडियो रेफरल में पता लगा कि गेंद स्टिक से लगकर नहीं गई थी। खेल के 41वें मिनट में रघुनाथ के बेहतरीन पास को रमनदीप ने गोल की तरफ मोड़ दिया और भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी। यह रमनदीप सिंह का रियो में पहला गोल था।

मैच के 52वें मिनट में कनाडा ने एक बार फिर मैच में वापसी करते हुए एक और गोल करते हुए मैच को 2-2 के स्कोर पर लाकर खड़ा कर दिया। स्कॉट टपर ने मैच में अपना दूसरा गोल किया। मैच के अंतिम 2 मिनट में भारतीय टीम ने जोरदार हमला करते हुए अजेय बढ़त लेने के उद्देश्य से गोल करने की कोशिश की लेकिन भारतीय टीम को सफालता नहीं मिली और मैच 2-2 के स्कोर पर ही ड्रॉ हो गया।

आपको बता दें कि इससे पहले नीदरलैंड से करारी शिकस्त झेलने के बावजूद भारतीय हॉकी टीम ओलिंपिक के क्वॉर्टरफाइनल में पहुंचने में सफल रही है। 1980 के बाद यह पहला मौका है, जब भारतीय हॉकी टीम ओलिंपिक के क्वॉर्टरफाइनल में पहुंची है। इस लिहाज से यह हॉकी टीम की बड़ी उपलब्धि है और लंबे अरसे बाद पदक की उम्मीद जगी है।