पर्यटकों को आकर्षित करने के चक्कर में रानी पद्मिनी को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका के रूप में प्रचारित कर राजस्थान का पर्यटन विभाग विवादों में घिर गया है. राजपूतों के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान में मौजूद उनकी विरासत की गलत तस्वीर पेश करने पर विभाग को कड़ा विरोध झेलना पड़ रहा है. चित्तौड़गढ़ स्थित रानी पद्मिनी तालाब और महल की तस्वीर के साथ किया गया ट्वीट इस विरोध के बाद हटा दिया गया है लेकिन उनकी यह करतूत अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. इस ट्विटर पोस्ट में चित्तौड़ पर आक्रमण करने वाले अलाउद्दीन खिलजी की बदनीयत का मुंहतोड़ जबाव देते हुए जौहर करने वाली रानी पद्मिनी को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका बताया गया. उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने प्रदेश में पर्यटन का बढ़ावा देने के लिए पिछले दिनों 'पधारो म्हारे देश' के स्थान पर जो 'जाने क्या मिल जाए' का बदलाव किया था. इसी बदलाव के तहत पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट बनाई गई और ट्विटर अकाउंट @my_rajasthan भी नया बनाया गया. इसी अकाउंट से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए राजपूतों के गौरवशाली इतिहास को गलत पेश किया गया

पर्यटन विभाग की ओर से ट्विटर पर जिस पद्मिनी को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका बताया गया उसके बारे में इतिहासकारों ने सवाल उठाया है कि 'रानी पद्मिनी खिलजी की प्रेमिका होती तो जौहर क्यों करती? बता दें कि पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की पत्नी थीं. कहा जाता है कि अद्वितीय सौन्दर्य की धनी पद्मिनी के बारे में जब दिल्ली पर राज कर रहे अलाउद्दीन खिलजी ने सुना तो वो कामांध हो गया था.

पर्यटन विभाग की ओर से ट्विटर पर जिस पद्मिनी को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका बताया गया उसके बारे में इतिहासकारों ने सवाल उठाया है कि 'रानी पद्मिनी खिलजी की प्रेमिका होती तो जौहर क्यों करती? बता दें कि पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की पत्नी थीं. कहा जाता है कि अद्वितीय सौन्दर्य की धनी पद्मिनी के बारे में जब दिल्ली पर राज कर रहे अलाउद्दीन खिलजी ने सुना तो वो कामांध हो गया था.

इतिहासकारों के अनुसार रानी पद्मिनी को हासिल करने के लिए उसने कई बार चितौड़ पर हमला किया. लेकिन सफल नहीं हुआ. इसी दौरान उसे मुंहतोड़ जवाब देने के लिए रानी पद्मिनी ने जौहर कर अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था.

कहा जाता है कि पद्मिनी को पाने की हसरत लिए अलाउद्दीन चित्तौड़ पहुंचा तो उसने छल से राजा रतन सिंह को संदेश भेजा कि वह पद्मिनी को अपनी बहन समान मानता है और उससे मिलना चाहता है. भारी सैन्य बल को देखते हुए रतन सिंह उसकी मंशा पहचाने गए थे लेकिन परिस्थितवश वे सुल्तान की बात पर सहमत हो गए. रानी को भी कांच में अपना चेहरा दिखाने के लिए राजी कर लिया गया. जब अलाउद्दीन ने पद्मिनी को कांच में देखा तो वो कामांध होकर उसे हासिल करने के लिए साजिश रचने लगा. कहा जाता है कि उसने धोखे से रतन सिंह को बंधक बना लिया

रतन सिंह को बंधक बनाने के बाद उससे कैद मुक्त करने के लिए रानी को सौंपने की शर्त रखी. इस पर रानी पद्मिनी की ओर से चौहान राजपूत सेनापति गोरा और बादल ने सुल्तान को हराने के लिए एक चाल चलते हुए खिलजी को संदेसा भेजा कि अगली सुबह पदमिनी को सुल्तान को सौप दिया जाएगा. अगले दिन सुबह भोर होते ही 150 पालकिया किले से खिलजी के शिविर की तरफ रवाना हुई और पालकिया वहां रुकी जहां रतन सिंह को बंदी बना रखा था. पालकियों को देखकर खिलजी ने सोचा पद्मिनी के साथ अन्य रानियां और दासियां भी यहां आयी होगी लेकिन उन पालकियो में ना ही रानी और ना ही दासिया थी और अचानक से उसमें से पूरी तरह से सशस्त्र सैनिक निकले और रतन सिंह को छुड़ा लिया गया. खिलजी के अस्तबल से घोड़े चुराकर तेजी से घोड़ों पर वहां से भाग निकले. गोरा इस दौरान बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए जबकि बादल रतन सिंह को लेकर सुरक्षित किले में पहुंचे थे.

इस घटना के बाद खिलजी ने अपमान का बदला चित्तौड़ पर विजय से चुकाना चाहता था. उसने 6 महीनों तक चित्तौड़ को घेरे रखा. गढ़ में खाद्य सामग्री खत्म होने लगी थी. तब राजपूत सैनिकों और वीरांगनाओं के पास जौहर और शाका का निश्चिय किया. रानी पद्मिनी समेत 1600 राजपूत रमणियों ने गोमुख में स्नान कर जौहर चिता में प्रवेश कर प्राण त्याग दिए. उधर, राजूपत सैनिक किले का दरवाजा खोल खिलजी की सेना पर टूट पड़े. सात दिन तक भयंकर युद्ध हुआ और 1303 के इस खूनी संघर्ष के बाद खिलजी ने चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया और खिज्र खां को शासक बना दिया.