छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के जंगल में मिला दोमुंहा सांप लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. छत्तीसगढ़ में ऐसा पहली बार हुआ है. इससे पहले चाइना और अमरीका जैसे देशों में इस प्रजाति का सांप वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों को मिलता रहा है. छत्तीसगढ़ में यह पहला केस है, जब इस तरह का सांप दिखा हो.

फिलहाल सांप को यहां राजधानी स्थित नंदनवन चिड़ियाघर में रखा गया है. यह सांप सैंड बोआ प्रजाति का बताया जा रहा है, जिसकी उम्र लगभग एक महीने और लंबाई डेढ़ से दो फीट के आसपास है. उसे देखने बड़ी संख्या में लोग नंदन वन का रुख कर रहे हैं.

इस दुर्लभ सांप को सर्वप्रथम महासमुंद के जंगल में गांववालों ने देखा. देखते ही देखते वहां भीड़ लग गई तो ग्रामीणों ने सांप को पकड़कर महासमुंद के रेंजर मानस राय के हवाले कर दिया. राय ने इस सांप को नंदन वन भेज दिया.

यह सांप सामान्य तौर पर ग्रामीण इलाकों में मिलता है और जमीन पर ही विचरण करता है. सामान्य तौर पर इसे लोग ग्रामीण इलाकों में मुसलेड़ी भी कहते हैं. इस सांप के बारे में कहा जाता है कि यह मवेशियों का दूध पी लेता है और अपनी पूंछ बछड़े के मुंह में रख देता है. यह बेहद ही सुस्त सांप है, इसकी लंबाई दो फिट से अधिक नहीं होती है.

नंदन वन के पशु चिकित्सक डॉ. जयकिशोर जड़िया के मुताबिक, यह सांप विषहीन है, जो मेंढ़क व कीड़े खाते हैं. ऐसा सांप पहली बार देखा गया है.

छत्तीसगढ़ में वन विभाग ने सांपों के सर्वे का जिम्मा नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी को दिया है. सोसायटी के मोइज अहमद ने बताया कि छत्तीसगढ़ में दोमुंहा सांप की इस तरह की प्रजाति पहली बार मिली है. इससे पहले भी दुर्लभ प्रजाति के इंडियन स्मूथ स्नेक और क्रोनेला ब्राचुरेला नाम के सांप भी यहां मिल चुके हैं. साथ ही दुर्लभ प्रजाति के ग्रीन कीलबैक यानी हरा ढोंरिया की खोज भी नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी ने की थी.