बिलासपुर । देश के राजधानी दिल्ली की जनता प्रदूषण की मार झेल रही दूसरी ओर कोटा नगर पंचायत अंतर्गत खुली एक कोलवाशरी के द्वारा वातावरण को प्रदूषित किये जाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि एक नई कोलवाशरी को गुपचुप तरीके से एनओसी देने का मामला सामने आने से कोटा की राजनीति गरमा गई है। कोटा के लोगों की माने तो नगर पंचायत कोटा को ना तो शहर के पर्यावरण से मतलब है ना ही यहां के नागरिकों के  स्वस्थ जीवन से, इसका ताजा उदाहरण है नगर के वार्ड क्रमांक 14 एवं 15 में फिर से नगर पंचायत ने अंदर ही अंदर एक और कोलवाशरी को एनओसी जारी करने की फिराक में थी लेकिन जैसे ही लोगों को पता चला सभी ने नगरपंचायत का घेराव कर दिया और एनओसी पर हस्ताक्षर होते होते रह गया। विभागीय सूत्रों की माने तो नगर पचांयत ने कोल वाशरी को एनओसी बेचने के लिए लाखों में सौदा किया हेै। जानकारी के अनुसार आज नगर पंचायत कार्यालय में सीएमओ सागर राज एनओसी का लेटर टाईप करवा रही थी उसी दौरान नगर के कुछ लोगों को इसका पता चल गया फिर क्या था सभी धीरे धीरे नगर पंचायत पहुंचने लगे। लोगों की बढ़ती भीड़ और हो हल्ला सुनकर सीएमओ तुरंत वहां से चलते बनी। एक पार्षद ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि नगर पंचायत के द्वारा एनओसी अनुमोदन करने के लिए रजिस्टर भेजा गया था जिसके साथ दस हजार रूपए भी भेजे गए थे। लगभग आठ से दस पार्षदों ने रजिस्टर पर दस्तखत किए हैं। विवाद को बढ़ता देख नगर पंचायत अध्यक्ष और सीएमओ दोनों कार्यालय से चलते बने। इसी बीच पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष अरूण त्रिवेदी भी नगर पंचायत पहुंच गए। साथ ही कई कांग्रेस के नेता नगर पंचायत पहुंचने लगे और हो हल्ला होने लगा। लोगों के दबाव मे आज तो एनओसी पर हस्ताक्षर नहीं हो पाया है लेकिन आने वाले समय मे ना हो ये भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि ऐसा ही मामला कुछ सालों पहले भी हो चुका है जिसका खामियाजा आज भी कोटा के नगरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। वार्ड नम्बर दो में भी एक कोल वाशरी को विवादों के बीच लंबी सेटिंग करके एनओसी दे दिया गया है। इस कोल वाशरी ने वार्ड एक, दो और तीन के लोगों का जीना मुहाल करके रखा है । कोयले के छोटे छोटे कण उडक़र खेतों और लोगों के मकानों तक आने लगे हैं । इस कोल वाशरी के विरोध में वार्ड के पार्षदों ने अपनी तरफ से कई आंदोलन और आवेदन लगाए लेकिन पैसे का जोर,सफेदपोश नेताओं और सत्ता से जुगाड़वालों का जोर,इंसानी स्वास्थ्य के उपर भारी पड़ता गया। नगर में एक कोल वाशरी से स्वास्थ्य का संकट तो है ही अब दुसरे कोल वाशरी से पूरा नगर कोयले के प्रदूषण में ढक जाएगा और लोगों का स्वास्थ्य यहां का पर्यावरण सब खतम लेकिन इसकी परवाह किसे है ना शासन को ना प्रशासन। कम से कम नगर पंचायत के कुछ माननीयों को तो कतई नहीं जो चंद रूपयों की खातिर नगर के पर्यावरण और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने से नही चुक रहे हैं। नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अरूण त्रिवेदी का कहना था - नगर पंचायत सीएमओ और अध्यक्ष के द्वारा पैसे ले देकर नगर के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है । नगर पंचायत के उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल ने कहा- हमको तो किसी चिज की जानकारी नहीं थी ये लोग धोखे से या लालच से पार्षदो से हस्ताक्षर ले लिया गया है ।