वर्षा ऋतू के अंतिम चरण और शीत ऋतू के आगमन के पंद्रह दिन पहले से और नै ऋतू के पंद्रह दिनों का समय संधिकाल कहलाता हैं। इन दिनों में हमें वर्षा ऋतू की आदतें धीरे धीरे छोड़े और शीत ऋतू के आगमन का स्वागत करे। यानी वर्षा ऋतू की आदतें धीरे धीरे त्यागे और शीत ऋतू की आदत स्वीकार करने की आदत बनाये या अपने आप को ढालें। इन दिनों में सामान्य रोग का संक्रमण होने की संभावना होती हैं।
ऋतु परिवर्तन के साथ, कई लोग खाँसी और सर्दी से पीड़ित होते हैं।  एक चीज जो मौसम में बदलाव होने पर आती है वह है फेफड़े में संक्रमण के साथ सर्दी और खांसी। ज्यादातर लोग मौसम के बदलाव के समय एक तापमान से दूसरे तापमान पर जाते हैं जिससे उन्हें इस बात का डर सताता रहता है कि उनका शरीर मौसम में परिवर्तन पर कैसे प्रतिक्रिया देगा। जब मौसम में परिवर्तन के कारण यह अत्यधिक गर्म या ठंडा होता है तो, ज्यादातर लोगों को सर्दी और खांसी की शिकायत  होने लगती है। मौसम में होने वाले परिवर्तन के कारण सर्दी और खांसी से सबसे अधिक बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित होते हैं।
सर्दियों से गर्मी में मौसम बदलने के साथ, मिश्रित मौसम हमेशा खांसी और आम सर्दी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। और हर बार एलोपैथिक उपचार पर निर्भर रहना ठीक नहीं है क्योंकि उन दवाओं के दुष्प्रभाव भी हो सकते है। इसके बजाय, कुछ घरेलू उपचारों को आज़माएं जो इसे ठीक करने के लिए अच्छे और आसान हैं और इन उपायों के कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं!
ठंड का मौसम शुरू हो गया है। अगर आप भी मौसम बदलने पर सर्दी और खांसी का शिकार  हो जाते हैं, तो इन मौसमी बीमारियों से बचने के लिएअपनी दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव करें। हालांकि, इसे रोकने के लिए सभी को थोड़ी योजना बनानी होगी ताकि शरीर को बदलाव के लिए तैयार किया जा सके और सर्दी या खांसी से बचा जा सके।
मौसम बदलते ही कुछ लोगों को अलग- अलग तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं, जैसे- सर्दी, जुकाम, खांसी,  बुखार, बैक्टीरियल इंफेक्शन, उर्जा में कमी और सुस्ती आदि। अगर आपका शरीर मोसम के प्रति अधिक संवेदनशील है, तो मौसम के बदलते ही आपको कई तरह की परेशानियां होना स्वाभाविक हैं। कुछ चीजें हैं जिन्हें आप सर्दी-खांसी से बचने के लिए कर सकते हैं।
ठंड से अचानक संपर्क में आने से बचें, एक गर्म कमरे से लेकर ठंडी सड़क पर, खासकर शाम और सुबह के समय में। जिन्हें सुबह और शाम की सैर की आदत होती है, उन्हें इस मौसम परिवर्तन के दौरान अपनी दिनचर्या बदलनी पड़ सकती है। सूर्य निकलने के बाद ही सैर पर जाए विशेषकर हृदय रोगी ,श्वाश रोगी।
ठंडे फ़ूड आइटम जैसे कि कोल्ड ड्रिंक्स, मिल्क शेक और आइस-क्रीम खाने से बचें।
गर्म पानी से स्नान करना, सुबह जल्दी और देर शाम को भोजन करना उचित है।
खट्टे पदार्थ, अचार और तले हुए खाद्य पदार्थ जैसे खाद्य पदार्थों से बचें।
छोटे, लेकिन बार बार भोजन करें जो ताजा तैयार किया गया हो, वे पौष्टिक और मध्यम तापमान के होते हैं।
यदि आपके पड़ोस में संक्रमित लोग हैं, तो उनके साथ निकट संपर्क में रहने से बचें क्योंकि इससे आप भी संक्रमित भी हो सकते हैं।
कीटाणुओं से मुक्त रखने के लिए अपने हाथों को सही तरीके से धोएं।
ठंडा मौसम आपको प्यासा नहीं करता है, मतलब आपको ठंड में कम प्यास लगेगी। ऐसे मौसम में पर्याप्त तरल पदार्थों को लें ताकि आपका शरीर हाइड्रेटेड रहे।
यदि पानी का पर्याप्त मात्र में सेवन नहीं कर पा रहें है, तो गर्म पानी या चाय पीएं।
घर को साफ सुथरा रखना सुनिश्चित करें, विशेष रूप से किचन और बाथरूम साफ और कीटाणुरहित होना चाहिए।
धूल और पराग के संपर्क में आने से बचें क्योंकि वे बहुत सारे कीटाणु आपने साथ ले आते हैं।
एक खराब हवादार कमरे में रहने से बचें, पर्याप्त हवा का आना और जाना सुनिश्चित करता है कि रोगाणु एक कमरे में केंद्रित नहीं हैं।
जो लोग खांसी और सर्दी के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं, उन्हें च्यवनप्राश या आंवला मुरब्बा का सेवन करना चाहिए, क्योंकि यह खांसी और सर्दी के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरक्षा शक्ति विकसित करने में मदद करता है।
सर्दी होना इतनी आम है कि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, वयस्कों को हर साल लगभग दो बार सर्दी लगने की उम्मीद हो सकती है। हालांकि सर्दी होना आमतौर पर खतरनाक नहीं होता है, लेकिन यह एक व्यक्ति को सामान्य कामकाज में परेशान कर सकती है।
वर्तमान में सर्दी का कोई इलाज नहीं है लेकिन कई घरेलू उपचार हैं जो इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं। सर्दी के लक्षणों में एक गले में खराश, नाक बहना, खांसी, काफ बनना और दर्द आदि शामिल हैं।
सौभाग्य से, अधिकांश घरेलू उपचारों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है, इसलिए भले ही वे सर्दी खांसी में केवल सीमित मदद करें, लेकिन वे कोई नुकसान नहीं करेंगे।
1. भाप को साँस से लेना, आप नीलगिरी के तेल को मिलाकर भाप ले सकते हैं। सर्दी के लिए, भाप लेना सबसे अच्छा घरेलू उपाय है। गर्म पानी में नीलगिरी का तेल मिलाएं जो आप भाप साँस के लिए उपयोग करेंगे, यह तुरंत राहत देगा।
2. अदरक और लहसुन से बना गर्म सूप पीने से यह गले को शांत करता है। और सर्दी से आराम दिलाता है।
3. अदरक और इलायची और दालचीनी जैसे अन्य मसाले भी चाय में डाले जा सकते हैं।
4. गर्म सूप, विशेष रूप से मसालेदार सूप, नाक के जल निकासी को बढ़ावा दे सकते हैं और श्वास को आसान बना सकते हैं।
5. जिन लोगों को सर्दी है, उन्हें शराब से बचना चाहिए, क्योंकि यह शरीर के निर्जलीकरण में योगदान कर सकती है।
6. नींबू और शहद को एक गिलास गर्म पानी में मिलाएं और पीयें। यह मौसम परिवर्तन के कारण गले में हो रही खराश को शांत करेगा और सर्दी से लड़ने में मदद करेगा।
7. नार्मल सर्दी जुकाम होने पर तुलसी के पत्तों को चबाना फायदेमंद हो सकता है।
8. बालको को  सोने से पहले बच्चों को शहद देने से रात में खांसी कम हो जाती है।
नोट – शहद 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें बोटुलिनम बीजाणु होते हैं। यदि बच्चे के अपरिपक्व पाचन तंत्र में बीजाणु बढ़ते हैं, तो वे एक बच्चे को बीमार कर सकते हैं।
9. नाक के मार्ग को जितना संभव हो सके साफ करने के लिए नाक को सही ढंग से साफ करना महत्वपूर्ण है। बलगम के कारण कान में बल पड़ सकता है और कान में दर्द हो सकता है।
10. नाक को सही ढंग से बाहर निकालने के लिए, लोगों को एक नथुने को अवरुद्ध करना चाहिए और धीरे से दुसरे नथुने से नाक को बाहर निकलना चाहिए, फिर विपरीत नथुने को ब्लॉक करें और नाक बाहर करें।
11. प्राणायाम और जलनेति जैसे योग व्यायाम नाक गुहा को साफ करने में मदद करते हैं, इसे साइनस के इन्फेक्शन को रोकने और बलगम को साफ करने के लिए किए जा सकता है।
12.  गर्म पानी में चुटकी भर नमक डालकर गरारे करने से गले की खराश ठीक करने में मदद मिलती है।
13. गर्म पानी में हल्दी पाउडर, अदरक पाउडर और एक चम्मच शहद मिलाएं। यह न केवल खांसी को ठीक करने में मदद करता है बल्कि शरीर के दर्द, सर्दी और सिरदर्द से भी छुटकारा दिलाता है।
14. अपनी चाय तैयार करते समय, काली मिर्च के साथ तुलसी के कुछ पत्ते और अदरक मिलाएं, यह खांसी और सर्दी में बहुत राहत देता है।
15. गले की खराश को ठीक करने के लिए गरारे करने के अलावा, एक गिलास पानी में चुटकीभर नमक और घी की कुछ बूंदें मिलाएं और इसे पीएं। यह खांसी से छुटकारा पाने के लिए बहुत प्रभावी घरेलू नुस्खा है।
16. अपने स्नान के गुनगुने पानी में नीलगिरी के तेल की कुछ बूँदें मिलाएं – यह आपको शरीर के दर्द से उबरने में मदद करेगा।
17 इन दिनों में सरसों की तेल की मालिश लाभकारी रहता हैं। इससे रक्त प्रवाह बढ़ता हैं और त्वचा पर रुक्षता दूर होती हैं।
18   शीत ऋतू में सब्जियों की बहार रहती हैं अपने अनुकूल हरी साग सब्जियों ,फलों का उपयोग करे।
19  औषधियों में सितोपलादि चूर्ण ,तालीसादि चूर्ण ,त्रिकटु चूर्ण ,त्रिभुवन कीर्ति रस ,लक्ष्मी विलास रस ,खदिरादि वटी ,लवंगादि चूर्ण ,कांसादि वटी ,तुलसी कुफ  सिरप ,
20 लवंग ,कालीमिर्च, सौंठ  अदरक उपयोगी हैं।
२१ जिन लोगों की प्रतिरोधक शक्ति कमजोर रहती हैं उन्हें बृहद हरिद्राखंड या हल्दी का उपयोग करने से उनकी इम्युनिटी में लाभ होता हैं। यदि इसका नियमित उपयोग होना लाभकारी हैं।