बारिश के बाद मौसम में आए बदलाव से खेतों में खड़ी धान की फसल पर अब झुलसा, बंकी बीमारी और भूरा महो जैसे कीटों का प्रकोप हो रहा है। इस वजह से किसानों को फसलों के नुकसान होने का भय सता रहा है। एक तरफ फसलों में बीमारियां लग रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर कृषि विभाग का अमला इससे अनभिज्ञ है। अब किसान बीमारी से अपनी फसलों को बचाने के लिए उपाय की तलाश में जुटे हैं।

जिले के किट निगरानी दल ब्लॉकों में विजिट नहीं कर रही है। हालात यह है कि धान की फसल में लगे किट और बीमारी नियंत्रण के लिए किसानों को व्यापारियों से सलाह लेनी पड़ रही है। व्यापारी अपने फायदे के लिए जो भी दवाई बता रहे हैं उसी का छिड़काव कर रहे हैं। इससे फसल के साथ किसानों के जमीन पर विपरित प्रभाव पड़ रहा है। जिले के किट निगरानी दल जिसे डाइग्नोस टीम भी कहा जाता है में कृषि विज्ञान और अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों के अलावा कृषि विभाग के अधिकारी में शामिल रहते हैं। यह टीम हर ब्लॉक के गांवों में जाकर किसानों के खेतों का विजिट करती है। वहां लगे धान और अन्य फसल में लगे किट और रोगों को देखकर उसका उपाय बताते हैं।

कीट प्रबंधन के लिए यह करें किसान

कीट प्रबंधन यदि कीट की संख्या एक या एक से अधिक प्रति पौध दिखायी दे तो मालाथियान पांच प्रतिशत विष धूल की 500-600 ग्राम मात्रा प्रति नाली की दर से छिड़काव करें। खेत के मेड़ों पर उगे घास की सफाई करें क्योंकि इन्ही खरपतवारों पर ये कीट पनपते रहते हैं और दुग्धावस्था में फसल पर आक्रमण करते हैं। 10 प्रतिशत पत्तियां क्षतिग्रस्त होने पर केल्डान 50 प्रतिशत घुलनशील धूल का दो ग्राम/ली. पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।