बिलासपुर- बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कोरोना काल की वजह से 1 साल से बंद पड़े अपने कार्यक्रम हमर पहुना का एक बार फिर शुभारंभ की गया. जिसमें बिलासपुर रेंज के आईजी रतनलाल डांगी पहले मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. जिन्होंने पत्रकारों से रूबरू होते हुए अपने जीवन से सम्बंधित रोचक बातें साझा की. साथ ही बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था और युवाओं पर भी अपने विचार रखे. मूलतः राजस्थान के नागौर जिले के अंतर्गत मलास के रहने वाले, 28 सालों से देश की सेवा में तत्पर रतनलाल डांगी वर्तमान में बिलासपुर रेंज के आईजी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. आईजी रतनलाल डांगी हमेशा से लोगों के बीच में एक यूथ आईकॉन और एक बेहतर समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते हैं, मंगलवार को बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित की जाने वाली हमर पहुना कार्यक्रम में वें मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. जहां समस्त पत्रकार साथियों द्वारा पूरी गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया उन्होंने पत्रकारों से रूबरू होते हुए अपनी जिंदगी और अपनी कार्यशैली के संबंध में खुलकर बात की. इस दौरान सोशल मीडिया के द्वारा आम जनता से हमेशा जुड़कर रहने के पीछे की वजह के सवाल पर उन्होंने कहा कि, वे एक खुली किताब है जिसके बारे में हर कोई हर चीज जानता है, चाहे वह सोशल मीडिया के माध्यम से हो या फिर व्यक्तिगत तौर पर. उन्होंने कहा कि दूसरे क्या सोचते हैं इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता उनका उद्देश्य केवल दूसरों को प्रेरित करना है उन्हें मोटिवेट करना है कि अगर हम इस मुकाम पर पहुंच सकते हैं तो आप भी मेहनत और संघर्ष से आसानी से इस मुकाम को पा सकते हैं. उन्होंने कहा कि आम आदमी से जुड़कर रहने का मकसद केवल इतना है कि वह उन तक ये बात पहुंचाना चाहते हैं कि पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी भी उन्हीं की तरह ही एक आम आदमी है जिनसे वे खुलकर बेझिझक बात कर सकते हैं. तु यूथ आइकन के रूप में जाने जाने को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को सही रास्ता दिखाना है. उन्हें मोटिवेट करने के लिए उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकालने के लिए उनके फिजिकल मेंटल फिटनेस और उनके हेल्थ के लिए पिछले 1 साल से उनके द्वारा मुहीम चलाया जा रहा है जो अभी भी जारी है काफी लोगों ने इसकी सराहना भी की है और मोटीवेट भी हुए हैं. उन्होंने कहा कि वे जितने भी युवाओं से मिलते हैं उन्हें केवल पुलिस विभाग में आने के लिए ही मोटिवेट करते हैं क्योंकि पुलिस ही एक ऐसा विभाग होता है जो आम आदमियों की समस्याओं को सुनता है, उसे दूर करने की कोशिश करता है, उसे कम करने की कोशिश करता है, और उसकी सुरक्षा भी करता है. सड़क किनारे खड़े होकर वसूली करने वालों के रूप में पुलिस की छवि बनाने को लेकर उन्होंने कहा कि सड़क पर खड़े हुए पुलिस को देखकर लोगों के मन में यही छवि बन जाती है कि पुलिस वसूली करने के लिए खड़ा रहता है मगर पूरे कोरोना काल में भी जब सड़कों पर एक व्यक्ति भी नजर नहीं आता था तब भी तपती धूप में पुलिस के जवानों ने खड़े रहकर इमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया है और तब वें किसी वसूली के लिए नहीं खड़े हुए थे. आम आदमियों से पुलिस की अपेक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि पुलिस की आम आदमी से केवल एक ही अपेक्षा होती है कि वे अपने बच्चों को सही संस्कार दें उन्हें सुरक्षा के नियम से परिचित कराएं, दूसरों के इज्जत आबरू की रक्षा करना सिखाए, नशे से दूर रखें अपने बच्चे को ऐसे संस्कार दें जो इस दुनिया को सुंदर बना सके. एक बेहतर पुलिसिंग का मतलब समझाते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर पुलिसिंग का मतलब है कि आम आदमी पुलिस को अपना मित्र समझे और बेझिझक होकर अपनी बात पुलिस के सामने रख सके और पुलिस भी कानूनी तौर के साथ ही मानवीय दृष्टिकोण से भी आम आदमी की मदद करें, उसे गाइड करें और उसे उचित न्याय दिलाएं यही बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था है. कोरोना काल में पुलिस की छवि को लेकर उन्होंने कहा कि पूरे कोरोना काल में पुलिस ने बेहतर और इमानदारी से अपना काम किया है. मीडिया के माध्यम से पूरे देश में कोरोना काल के दौरान पुलिस का एक मानवीय चेहरा भी सामने आया जहां वे कहीं लोगों की मदद करते हुए तो कभी अपनी जान की परवाह किए बिना इमानदारी से फ्रंट लाइन पर तैनात नज़र आये उन्होंने कहा कि पुलिस की बेहतर छवि बनाने में मीडिया का बहुत बड़ा रोल रहा क्योंकि उन्होंने ही पुलिसिंग की व्यवस्था को लोगों के सामने लाई है. युवाओं के करियर को लेकर उन्हें एक विशेष संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को हमेशा सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए जो चीजें बेहद जरूरी है केवल उन चीजों पर ही अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए. उन्हें वही चीजें देखना चाहिए, पढ़ना चाहिए, सुनना चाहिए या करना चाहिए जो उन्हें उनके लक्ष्य की प्राप्ति में काम आय बिलासपुर रेंज आईजी रतनलाल डांगी पिछले 28 सालों से यानी 1993 से पुलिस के तौर पर लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. करियर की शुरुआत में उन्होंने 6 साल शिक्षक के रूप में कार्य किया, 2 साल सब इंस्पेक्टर रहे, 2 साल तहसीलदार के रूप में उन्होंने काम किया उसके बाद अलग-अलग जिलों के एसपी, डी आई जी रहे और अब आई जी के रूप में बिलासपुर को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।