बिलासपुर। दो दशक तक सत्ता में बने रहने के बाद जनाधार देने और चुनाव में मिली पराजय से पूर्व मंत्री और भाजपा नेता अमर अग्रवाल 2 साल तक आराम करने और अपने व्यापार के पेंडिंग कामों को निपटाने के बाद 2023 के चुनाव की तैयारी में जुट गए है । पहले उन्होंने पूरे शहर की तासीर जानने की कोशिश की और उनके बगैर शहर की जनता क्या महसूस करती है इसकी जानकारी अपने समर्थकों और अन्य माध्यमों से लेने के बाद उन्होंने आंदोलन के लिए सड़क पर उतरने का मन पूरी तरह बना लिया है । पहले उन्होंने भाजपा ,भाजयुमो और भाजपा के अन्य अनुशांगिक संगठनों में अपने लोगो को जगह दिलाने का काम किया उसके बाद चुनावी तैयारी में जुट जाने का सबको तैयार रहने हरी झंडी दे दिया है ।शहर में फिर से चुनावी रण जीतने के लिए उन्होंने शहर के लोगो की समस्याओं को जोर शोर से उठाने और इसके लिए लगातार 2 साल तक बिना रुके आंदोलन करने का भी निर्णय लिया है ।महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री अग्रवाल तमाम आंदोलन में शामिल रहेंगे ।श्री अग्रवाल ने अपने समर्थको को यह भी बता दिया है कि जनता से जुड़ी ऐसी समस्याओं और मुश्किलों को भाजपा उठाएगी जिसमे प्रशासन और शासन को यह कहने का मौका ही नही दिया जायेगा कि समस्या को दूर करने राशि या बड़ी बजट की जरूरत है ।बगैर धनराशि के भाजपा के दबाव में यदि जनता की समस्या दूर की जाती है तो इसका श्रेय भी भाजपा को मिलेगा और उसका लाभ चुनाव में जरूर मिलेगा ।शुरुआती आंदोलन शहर की सड़कों ,अमृत मिशन की खुदाई के बाद सड़कों की हालत ,सिवरेज की जांच ,तहसील आफिस में नामांतरण ,फौती आदि में हो रही देरी से भटक रहे लोगो की समस्या जल्द दूर करने ,शहर के तालाबों के रखरखाव में लापरवाही ,अवैध प्लाटिंग ,सरकारी जमीन पर कब्जा जैसे जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा ।इसके लिए श्री अग्रवाल ने अपने समर्थको को पूरी तैयारी कर लेने के लिए कह दिया है ।
पूरे छत्तीसगढ़ में भाजपा के दो ही नेताओं को बेहतर चुनावी प्रबंधन के लिए जाना जाता रहा है । एक बृजमोहन अग्रवाल और दूसरे अपने बिलासपुर के अमर अग्रवाल हालांकि बृजमोहन अग्रवाल तो विधानसभा चुनाव अपने व्यक्तिगत छवि के कारण फिर से जीत गए मगर अमर अग्रवाल को शहर की जनता ने इस बार आराम करने की सलाह दे डाली । श्री अग्रवाल चार बार विधायक बने और चारों बार उनका साथ उनका बेहतर चुनावी प्रबंधन ने दिया मगर 5वी बार उनका चुनावी प्रबंधन कैसे फेल हो गया और कहां कमी रह गई इसका चिंतन उन्होंने जरूर किया होगा ।उनके चुनाव हार जाने के पीछे कई कारण है एक तो स्वयं शहर के मतदाताओं ने बदलाव करने ठान लिया था उसके बाद दूसरा बड़ा कारण जो काफी चर्चा का विषय रहा वह यह कि उनके अपने लोगो ने उन्हें अंधेरे में रखा ।अब जबकि चुनावी नतीजे को दो बरस से ऊपर हो चुके इसलिए शहर की जनता का पुन: विश्वास अर्जित करने श्री अग्रवाल ने अभी से रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।उन्हे टिकट की कोई चिंता नहीं है इसी बीच यह भी चर्चा निकल कर आती है कि श्री अग्रवाल अब केंद्र की राजनीति में जाना चाहते है और लोकसभा चुनाव लडऩे की उनकी मंशा है खैर राजनीति में कई तरह की गुणा भाग चलती रहती है ,कब क्या हो जाए कोई नही जानता ।राजनीति तत्कालिक परिस्थिति पर भी बहुत कुछ निर्भर करती है अन्यथा कौन जानता था कि 4 माह पहले ही कांग्रेस की राजनीति में आए एकदम नए चेहरे शैलेष पाण्डेय से भाजपा के कद्दावर नेता समझे जाने वाले अमर अग्रवाल चुनाव हार जायेंगे ।