बिलासपुर  नगर पालिक निगम से अब सुस्त और काम चलाऊ ठेका कंपनियों व ठेकेदारों की खैर नहीं है। मेयर ने ऐसे ही दो ठेका कंपनियों का ठेका निरस्त करने कहा है, जबकि एक ठेका कंपनी के कामकाज की जांच कराने कहा है। दो कार्यों का नए सिरे से टेंडर करने के निर्देश आयुक्त को जारी किए गए हैं। ये दो काम ऐसे थे, जिसे बीजेपी से जुड़े ठेकेदार बीजेपी शासनकाल में सत्ता की आड़ में टेंडर अवधि खत्म होने के बाद भी एमआईसी से दो-तीन महीने तक एक्टेंशन लेकर मलाई खा रहे थे। मेयर रामशरण यादव का कहना है कि हमें कामचोर और सुस्त कार्यप्रणाली अपनाने वाली ठेका कंपनियों और ठेकेदारों की जरूरत नहीं है। ऐसी कंपनियां और ठेकेदार अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर चले जाएं।
लायंस सर्विसेस इंडिया कंपनी का ठेका होगा निरस्त
राज्य शासन ने दो साल पहले दिल्ली की लायंस सर्विसेस इंडिया कंपनी को शहर की सड़कों की सफाई करने का ठेका दिया था। इसके एवज में हर माह एक करोड़ 43 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है। ठेका शर्तों के अनुसार शहर की सड़कों की सफाई बीट बनाकर करनी है। हर बीट में 6-6 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जानी है। इतनी बड़ी रकम लेने के बाद भी कंपनी की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। मेयर यादव ने कुछ दिन पहले कंपनी को तीन पत्र लिखा और बीट की जानकारी मांगी, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। दो दिन पहले लायंस कंपनी के कर्मचारियों ने पांच माह का भुगतान नहीं होने का हवाला देते हुए काम बंद कर दिया। इसकी सूचना न तो मेयर को दी गई और न ही आयुक्त प्रभाकर पांडेय को। जबकि नियम के अनुसार काम बंद करने से तीन पहले निगम को सूचना देनी थी। मेयर ने कंपनी की इस लापरवाही को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कंपनी के अधिकारी को दो टूक शब्दों में कहा कि काम नहीं करना है तो चले जाइए। शासन से राशि आएगी, तब भुगतान किया जाएगा। उन्होंने 31 मार्च को आयोजित सामान्य सभा की बैठक में कंपनी का ठेका निरस्त करने का प्रस्ताव लाने के निर्देश जारी किए हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस के 16 और भाजपा के 14 पार्षदों ने लायंस कंपनी के खिलाफ मेयर के पास लिखित में शिकायत की है। इसमें रोड की सफाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है। मेयर के कड़े तेवर को देखते हुए कंपनी ने मंगलवार को शहर के आधे से अधिक वार्डों में सफाई कराई है।
रामके कंपनी के कामकाज पर बिठाई जांच
राज्य शासन ने दो साल पहले हैदराबाद की रामके कंपनी को डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने का ठेका दिया गया था। इसके एवज में प्रतिमाह कंपनी को 1 करोड़ 77 लाख का भुगतान किया जा रहा है। शिकायत मिल रही है कि गाड़ियों में कचरे के बोल्डर भरकर भेजा जा रहा है, ताकि वजन बढ़ाया जा सके। मेयर ने रामके कंपनी के कामकाज की जांच करने के निर्देश आयुक्त को दिए हैं।
पहले 48 लाख में हो जाता था काम
लायंस और रामके कंपनी को ठेका देने से पहले यह काम नगर निगम के कर्मचारी करते थे, तब दोनों कंपनियों द्वारा किया जा रहा काम महज 48 लाख में हो जाता था, जबकि वर्तमान में इन कामों के एवज में 3 करोड़ 20 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है। मेयर यादव का कहना है कि नगर निगम की राशि को पानी की तरह अब नहीं बहाया जाएगा। पब्लिक के पैसे का समुचित उपयोग किया जाएगा।
स्पेयरो कंपनी को खदेड़ा जाएगा
राज्य शासन ने स्पेयरो नामक कंपनी को सभी तरह के टैक्स और बाजार विभाग की दुकानों की किराया वसूली का ठेका दे रखा है। ठेका शर्तों के अनुसार कंपनी को हर साल 90 प्रतिशत राशि वसूली करनी है। इसके एवज में कंपनी को साढ़े सात प्रतिशत कमीशन दिया जाएगा। इस काम में निगम के कर्मचारी भी कंपनी का सहयोग कर रहे हैं। शुरुआत से ही टैक्स और किराया वसूल करने में कंपनी फिसड्‌डी साबित हुई। हालात यह है कि चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में कंपनी को 59 करोड़ रुपए वसूलने का टारगेट मिला हुआ है, जबकि अब तक मात्र 23 करोड़ की वसूली हुई। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब महज 13 दिन बचे हुए हैं। ऐसे में 36 करोड़ की वसूली कैसे हो पाएगी। मेयर यादव ने इस कंपनी के कामकाज को लेकर जमकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने 31 मार्च को सामान्य सभा में इस कंपनी से काम छिनने का प्रस्ताव लाने आयुक्त को कहा है।
इन दो कामों का होगा नया टेंडर
भाजपा से जुड़े पांच ठेकेदारों को हर माह 35 लाख रुपए में शहर की नालियों की सफाई करने का जिम्मा मिला था। इन्हें रोजाना 220 कर्मचारी लगाना है, लेकिन शहर की नालियों की दशा देखकर कोई नहीं कहेगा कि 100 कर्मचारी भी काम पर आ रहे होंगे। इनका टेंडर खत्म हुए एक साल से अधिक हो गए हैं, लेकिन राज्य और निगम में बीजेपी का शासन होने का इन्हें फायदा मिलता रहा और एमआईसी से दो तीन माह में दो-तीन माह का एक्सटेंशन लेकर ये ठेकेदार मलाई खाते रहे। मेयर यादव के पास जैसे ही इनकी फाइल ठेका एक्सटेंशन बढ़ाने के लिए आई तो उन्होंने फाइल को रोक दिया और आयुक्त को इन कार्यों का नए सिरे से टेंडर करने कहा है। इसी तरह रायपुर की एक कंपनी को जल विभाग को 65 पंप ऑपरेटर उपलब्ध कराने का ठेका मिला हुआ था। इनका टेंडर भी एक साल पहले समाप्त हो चुका है, लेकिन यह कंपनी भी एमआईसी के जरिए एक्सटेंशन लेकर अब तक काम चलाता रहा। मेयर ने इस कंपनी को भी एक्सटेंशन देने से इनकार कर दिया और नए सिरे से टेंडर करने कहा है।