अयोध्या. अयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से फैसला आने के बाद विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) विवादित ढांचे के विध्वंस की 28वीं बरसी पर शौर्य दिवस (Shaurya Diwas) न मनाने का आह्वान किया है. पहले वृहद स्तर पर अयोध्या सहित पूरे देश में 6 दिसंबर को शौर्य दिवस के रुप में मनाया जाता था. इस बार शौर्य दिवस के स्थान पर मठ, मंदिरों और घरों में दीप प्रज्वलित कर मंदिर के पक्ष में आए फैसले को लेकर खुशी का इजहार करने की अपील की गई है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं करना चाहते सिमित
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का देशभर में स्वागत किया गया था. ऐसे में विहिप नहीं चाहती कि न्यायालय द्वारा दिए गए इतने बड़े निर्णय को में सीमित कर दें. विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा का कहना है कि 6 दिसंबर 2019 की तिथि संपूर्ण देश के लिए सत्य और विजय के रूप में याद दिलाती रहेगी. अब राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का समय करीब है. अब राम भक्तों को शौर्य और विजय दिवस रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के बाद मनाने का अवसर प्राप्त होगा.
देश का अमन और चैन न बिगड़े
शरद शर्मा ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद ऐसा कोई काम करना नहीं चाहती जिससे कि देश का अमन और चैन बिगड़े. फैसले के बाद देश में जो सौहार्दपूर्ण वातावरण कायम है, उसको बिगाड़ने का काम नहीं करें. उन्होंने कहा कि 6 दिसम्बर 1992 को वह कलंकित ढांचा ध्वस्त हुआ था. अब इस घटना को 28 साल हो गए. अब राम मंदिर पर फैसला आ गया है. अब यह सत्य साबित हो चुका है कि वहां रामलला विराजमान का ही कब्ज़ा है. ऐसे में भव्य राम मंदिर निर्माण होने वाला है. लिहाजा अब सार्वजानिक स्थानों पर किसी सभा या जुलूस करने की जरुरत नहीं है. अब जो भी शौर्य दिवस मनाया जाएगा वह राम मंदिर बनने के बाद ही होगा.
शरद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी समुदायों के लोगों ने सवागत किया है. हमें ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़े. लिहाजा अब जो कुछ भी होगा वह राम दरबार में राम मंदिर बनने के बाद ही होगा