छत्तीसगढ़ के दस जिलों में रेलवे ट्रैक किनारे की जमीन पर अधिक अतिक्रमण हुआ है। कब्जा कराने के लिए भू-माफिया भी सक्रिय हैं। रेलवे को इनसे निपटने न्यायालय तक जाना पड़ता है। यही नहीं पिछले चार साल के दौरान बिलासपुर रेलवे जोन में सिर्फ 8.43 हेक्टेयर जमीन से कब्जा हटाया जा सका है। अब कब्जा घटकर 43.57 हेक्टेयर रह गया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में 2700 कब्जाधारी हैं।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के बिलासपुर, रायपुर, जांजगीर-चांपा, राजनांदगांव, कोरबा, रायगढ़, बालोद, धमतरी, दल्लीराजहरा व अंबिकापुर में रेलवे ट्रैक किनारे बड़ी संख्या में झुग्गियां हैं। कब्जाधारियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। रेलवे ने वर्ष 2010 के बाद अतिक्रमण हटाने कदम उठाया, लेकिन आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिली। रेलवे के अनुसार राज्य में 908.785 किमी रेलवे ट्रैक है। 38.2 किमी ट्रैक के किराने कब्जा हो गया है। धमतरी जिले में जहां नैरोगेज है, वहां भी ट्रैक किनारे झुग्गियां हैं। भू-माफियों की नजर में ऐसी रेल लाइन कमाई के सबसे बेहतरीन अड्डे हैं जिसमें वे कब्जा कराकर रेलवे को लाखों रुपये का नुकसान तो पहुंचाते ही हैं, आम जनता की जान को भी खतरे में डाल देते हैं।

जोन के पास 24 हजार 145 हेक्टेयर जमीन

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन बिलासपुर के पास कुल 24 हजार 145 हेक्टेयर जमीन है। रेलवे की रिपोर्ट के अनुसार जोन की 52 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण था। कार्रवाई के बाद आठ हेक्टेयर से अधिक जमीन को मुक्त करा लिया गया है।

प्रमुख जिलों में कितने कब्जाधारी

जिला कब्जा

बिलासपुर 208

रायपुर 307

जांजगीर-चांपा 398

राजनांदगांव 57

कोरबा 89

रायगढ़ 180

बालोद 28

धमतरी 192

दल्लीराजहरा 35

अंबिकापुर 55

राज्य के 10 बड़े जिलों में रेलवे ट्रैक किनारे अधिक अतिक्रमण है जिसे हटाने रेलवे द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। कब्जाधारियों को लेकर रेलवे नए सिरे से सर्वे भी करा रही है।